भाषा प्रेम

राष्ट्र प्रेम और भाषा प्रेम में कोई अंतर नहीं

भाषा प्रेम इतिहास के प्रकांड पंडित डॉ. रघुबीर प्राय: फ्रांस जाया करते थे। वे सदा फ्रांस के राजवंश के एक परिवार के यहाँ ठहरा करते थे। उस परिवार में एक ग्यारह साल की सुंदर लड़की भी थी। वह भी डॉ. रघुबीर की खूब सेवा करती थी। अंकल-अंकल बोला करती थी।(भाषा प्रेम) एक बार डॉ. रघुबीर …

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