हिंदुत्व

हिंदुत्व आज अचानक खतरे में नहीं आया है

हिंदुत्व

1)गुनाहों का देवता ही क्यों होता है ख्वाजा या पीर क्यों नहीं???

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2) हवस का पुजारी ही क्यों होता है मौलाना या मौलवी क्यों नहीं???

3) हर फ़िल्म में सुहागरात हिंदु की ही बताई जाती है मुसलमान की क्यों नहीं???

4) हर अपराध मंदिर में ही क्यों होता है मज़्जिद में क्यों नहीं???

5) धर्म के नाम पर लूटने वाला पंडित ही होता है कभी मौलवी नहीं???

6) फ़िल्म का मुख्य खलनायक अक्सर गले में रुद्राक्ष की माला या बड़ा सा तिलक लगाए हुए होता है मुस्लिम टोपी नहीं।

7) पुरानी फिल्मों के अधिकतर बलात्कारी अक्सर पुरी फ़िल्म में राम-राम या शिव-शिव तकिया क़लाम के रूप में प्रयोग करते थे कभी पीर-पैगंबर का नहीं।

8) शुद्ध हिंदी भाषा अधिकतर खलनायक भूमिका के लिए ही होती थी नायक अक्सर उर्दू या अंग्रेजी मिली हिंदी बोलता है।

9) इतिहास गवाह है भारतीय सिनेमा के इतिहास से आज तक एक भी फ़िल्म ऐसी बनी हो जिसमें किसी चर्च के फादर को किसी ग़लत कामो में लिप्त या धर्मान्तरण को बढ़ावा देते हुए बताया हो।

10) ईश्वर में आस्था रखने वाले हर हिन्दू चरित्र की पूरी फ़िल्म के दौरान हँसी उड़ाई जाती है।

11) न्याय के देवता श्री यमराज को मूर्ख तो वहीं कर्म के देवता श्री चित्रगुप्त को चरित्रहीन रसिया के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है।

हिंदुत्व आज अचानक खतरे में नहीं आया है,
ये तो उस विशाल बरगद के समान है जिसे खत्म करना आसान नहीं होता इसीलिए कई वर्षों से धीरे धीरे इसकी जड़ो को काटा जा रहा है।।
विचार करो जिस दिन ये पेड़ कट गया। उस दिन घुट घुट के मर जाओगे।।
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जनजागृति हेतु लेख लिखा गया है …🚩
महालक्ष्मी च विद्महे,🚩
विष्णुपत्नी च धीमहि,🚩
तन्नो लक्ष्मी: प्रचोदयात्।⛳⛳⛳

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